सम्राट अशोक महान फाउंडेशन गोण्डा (उ.प्र.) के तत्वावधान में रविवार, 02 अगस्त 2026 को विकासखण्ड तरबगंज के डॉ. बी.आर. अंबेडकर इंटर कॉलेज, रेतादलसिंह में एक महत्वपूर्ण समन्वय एवं तैयारी बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी 05 अप्रैल 2027 को आयोजित होने वाली चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान की जयंती को भव्य, दिव्य, ऐतिहासिक और समाजोपयोगी स्वरूप प्रदान करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करना था।

इस महत्वपूर्ण बैठक में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से भारी संख्या में मौर्यवंशी समाज के लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, किसानों, युवाओं, बुद्धिजीवियों तथा फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने सहभागिता की। उपस्थित लोगों ने मौर्यवंश की आन, बान, शान और गौरव के प्रतीक चक्रवर्ती सम्राट अशोक महान के मानवतावादी विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का सामूहिक संकल्प लिया।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सम्राट अशोक महान की जयंती केवल एक औपचारिक कार्यक्रम या उत्सव के रूप में आयोजित न की जाए, बल्कि इसे समाज की शैक्षिक, आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और व्यावहारिक उन्नति से जोड़ते हुए एक व्यापक जनजागरण अभियान बनाया जाए। वक्ताओं ने कहा कि सम्राट अशोक महान का जीवन और उनकी शासन व्यवस्था आज भी पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है।

सैकड़ों लोगों ने लिया ऐतिहासिक आयोजन का संकल्प

बैठक में उपस्थित सैकड़ों लोगों ने आगामी 05 अप्रैल 2027 को होने वाले जयंती समारोह को अभूतपूर्व स्वरूप देने का संकल्प लिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि सम्राट अशोक महान केवल मौर्य समाज के गौरव नहीं, बल्कि पूरे भारतवर्ष की महान ऐतिहासिक विरासत और विश्व शांति के संदेशवाहक हैं।

सम्राट अशोक महान ने अपने शासनकाल में जनकल्याण, सामाजिक समरसता, धार्मिक सहिष्णुता, करुणा, अहिंसा, न्याय और मानवता को सर्वोच्च स्थान दिया था। उन्होंने अपने शिलालेखों एवं स्तंभों के माध्यम से जनता को नैतिक जीवन, माता-पिता के सम्मान, जीवों के प्रति दया, सभी संप्रदायों के प्रति सम्मान तथा लोककल्याण का संदेश दिया। बैठक में इन्हीं आदर्शों को वर्तमान समाज में व्यावहारिक रूप से लागू करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई।

पदाधिकारियों एवं वक्ताओं ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को सम्राट अशोक महान के वास्तविक इतिहास, प्रशासनिक क्षमता, जनकल्याणकारी नीतियों और मानवतावादी दृष्टिकोण से परिचित कराना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए स्कूलों, कॉलेजों, गांवों, कस्बों और शहरी क्षेत्रों में विचार गोष्ठियों, सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, जागरूकता अभियानों और सामाजिक संवाद का आयोजन किया जाना चाहिए।

शिक्षा को बनाया जाएगा सामाजिक उत्थान का प्रमुख माध्यम

बैठक के दौरान समाज में शिक्षा के प्रसार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति शिक्षा के बिना संभव नहीं है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाना, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देना, आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की सहायता करना और मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उपस्थित लोगों ने कहा कि आगामी सम्राट अशोक जयंती के कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाजसेवियों को सम्मानित करने की दिशा में भी प्रयास किया जाना चाहिए। इसके साथ ही युवाओं को उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, स्वरोजगार, सरकारी सेवाओं और कौशल विकास से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

बैठक में यह विचार भी सामने आया कि समाज के शिक्षित और अनुभवी व्यक्तियों को आगे आकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना चाहिए। गांव और ब्लॉक स्तर पर ऐसे नेटवर्क तैयार किए जाने चाहिए, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को समय-समय पर करियर संबंधी उचित सलाह, अध्ययन सामग्री और प्रोत्साहन प्राप्त हो सके।

आर्थिक स्वावलंबन और रोजगार पर हुई चर्चा

बैठक में समाज की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने और युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने पर भी गंभीर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता सामाजिक सम्मान और विकास का प्रमुख आधार है। युवाओं को परंपरागत रोजगार के अतिरिक्त आधुनिक तकनीक, कृषि आधारित उद्योग, लघु उद्योग, व्यापार, डिजिटल सेवाओं और कौशल आधारित रोजगार की ओर प्रेरित किया जाना चाहिए।

कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को वैज्ञानिक एवं आधुनिक खेती अपनाने, नई तकनीकों की जानकारी प्राप्त करने और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक करने की आवश्यकता बताई गई। बैठक में उपस्थित कृषि वैज्ञानिक शिवकुमार मौर्य सहित विभिन्न वक्ताओं ने समाज की प्रगति में वैज्ञानिक सोच और व्यावहारिक ज्ञान की भूमिका पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को जरूरतमंद परिवारों और प्रतिभाशाली युवाओं की सहायता के लिए आगे आना चाहिए। समाज के भीतर सहयोग, संपर्क और संसाधनों का ऐसा तंत्र विकसित होना चाहिए, जिससे किसी योग्य युवा को आर्थिक या जानकारी के अभाव में अपने लक्ष्य से पीछे न हटना पड़े।

राजनीतिक और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता

बैठक में समाज को राजनीतिक रूप से जागरूक, संगठित और जिम्मेदार बनाने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श किया गया। वक्ताओं ने कहा कि राजनीतिक जागरूकता का अर्थ केवल चुनाव में मतदान करना नहीं है, बल्कि अपने संवैधानिक अधिकारों, कर्तव्यों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझना भी है।

समाज के लोगों से आह्वान किया गया कि वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, सामाजिक न्याय और स्थानीय विकास से जुड़े विषयों पर सक्रियता के साथ अपनी बात रखें। युवाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों, भारतीय संविधान और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना भी जरूरी बताया गया।

संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि समाज की शक्ति उसकी संख्या से अधिक उसकी एकता, जागरूकता, अनुशासन और सकारात्मक कार्यों में निहित होती है। किसी भी सामाजिक संगठन का उद्देश्य केवल कार्यक्रमों का आयोजन करना नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहयोग, सम्मान और विकास के अवसर पहुंचाना होना चाहिए।

सम्राट अशोक के मानवतावादी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान

बैठक के दौरान सम्राट अशोक महान के मानवतावादी विचारों पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि कलिंग युद्ध के पश्चात सम्राट अशोक ने हिंसा का मार्ग त्यागकर शांति, करुणा और धम्म का मार्ग अपनाया। उन्होंने अपने विशाल साम्राज्य की शक्ति का उपयोग केवल विस्तार के लिए नहीं, बल्कि प्रजा के कल्याण के लिए किया।

सम्राट अशोक द्वारा सड़कों का निर्माण, यात्रियों के लिए विश्राम स्थलों की व्यवस्था, मनुष्यों और पशुओं के उपचार के लिए औषधीय व्यवस्था तथा कुओं और वृक्षों की व्यवस्था जैसे जनकल्याणकारी कार्य आज भी आदर्श शासन की प्रेरणा देते हैं। उनके द्वारा स्थापित अशोक स्तंभ और सिंह शीर्ष आज भारत की राष्ट्रीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

वक्ताओं ने कहा कि सम्राट अशोक के विचार किसी एक जाति, वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं हैं। उनका संदेश पूरी मानवता के लिए है। इसलिए जयंती समारोह में सभी समाजों और समुदायों की सहभागिता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए।

कार्यक्रम को भव्य बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क पर जोर

बैठक में आगामी जयंती समारोह की सफलता के लिए गांव, न्याय पंचायत, विकासखण्ड और जनपद स्तर पर व्यापक संपर्क अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। उपस्थित लोगों से अपील की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर समाज के लोगों को कार्यक्रम के उद्देश्य, महत्व और प्रस्तावित गतिविधियों के संबंध में जानकारी दें।

कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं, विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों, शिक्षकों, व्यापारियों, किसानों और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि किसी भी बड़े सामाजिक आयोजन की सफलता सामूहिक सहयोग और जिम्मेदारियों के उचित वितरण से संभव होती है।

सभी लोगों से अपने समय, श्रम, विचार और क्षमता के अनुसार आयोजन में योगदान देने का आग्रह किया गया। बैठक में अनुशासन, पारदर्शिता, आपसी सम्मान और नियमित संवाद को आयोजन की सफलता का आधार बताया गया।

फाउंडेशन के पदाधिकारियों एवं गणमान्य लोगों ने किया संबोधित

बैठक को सम्राट अशोक महान फाउंडेशन के अध्यक्ष राजकिशोर मौर्य, संरक्षक कुँवर बहादुर मौर्य, शुभकरन मौर्य, रामकरन मौर्य, राजकरन मौर्य, वरिष्ठ उपाध्यक्ष घनश्याम मौर्य, कोषाध्यक्ष दयाशंकर लाल मौर्य, सचिव राजेश मौर्य, श्याम सुंदर मौर्य, लाल बहादुर मौर्य, रामकिशुन मौर्य, नगर उपाध्यक्ष अरुण कुमार मौर्य, ब्लॉक महामंत्री देवेन्द्र कुमार मौर्य, प्रदीप मौर्य, रंजीत मौर्य, ब्लॉक अध्यक्ष हरीशचंद्र मौर्य, राधेश्याम मौर्य, संगठन मंत्री आत्मा राम मौर्य, कृषि वैज्ञानिक शिवकुमार मौर्य, अरविन्द कुमार मौर्य, पूर्व प्रधान उधौराम मौर्य तथा मीडिया प्रभारी काशीराम मौर्य सहित अनेक पदाधिकारियों और गणमान्य व्यक्तियों ने संबोधित किया।

सभी वक्ताओं ने अपने संबोधन में संगठन की एकता, सामाजिक समरसता, शिक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और युवाओं की सक्रिय भागीदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आगामी जयंती समारोह समाज में नई ऊर्जा, जागरूकता और एकजुटता का माध्यम बनेगा।

समाज की एकता और सकारात्मक परिवर्तन का संदेश

समन्वय एवं तैयारी बैठक में भारी संख्या में मौर्यवंशी समाज के लोगों के साथ अन्य समुदायों एवं वर्गों के लोग भी उपस्थित रहे। बैठक का वातावरण उत्साह, अनुशासन और सामाजिक एकजुटता से परिपूर्ण रहा। उपस्थित लोगों ने सम्राट अशोक महान के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने तथा समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

बैठक ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि सम्राट अशोक महान फाउंडेशन केवल एक जयंती समारोह आयोजित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, आर्थिक विकास, मानवता, समानता और संगठनात्मक एकता की दिशा में दीर्घकालिक कार्य करने के लिए संकल्पित है।

आगामी 05 अप्रैल 2027 को आयोजित होने वाला सम्राट अशोक महान जयंती समारोह मौर्य समाज की एकता, ऐतिहासिक चेतना और सामाजिक संकल्प का विशाल मंच बनेगा। इस आयोजन के माध्यम से सम्राट अशोक महान के मानवतावादी विचारों, लोककल्याणकारी नीतियों और विश्व शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

बैठक के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने आपसी सहयोग, अनुशासन और समर्पण के साथ जयंती समारोह को ऐतिहासिक रूप से सफल बनाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम ने समाज में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया तथा यह विश्वास मजबूत किया कि संगठित प्रयासों से शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

जय भारत! जय संविधान! जय सम्राट अशोक!